Posts

Showing posts from July 30, 2019

वाते मुंगा मोलारी (My swan song) गोर बोलीभाषाविज्ञान अन व्याकरण - चिंतन !- भाग २ गोर बोलीभाषारो भाषिक रुप - भीमणीपुत्र मोहन नाईक

Image
*वाते मुंगा मोलारी*             my swan song *गोर बोलीभाषाविज्ञान अन व्याकरण - चिंतन!*            भाग २ *गोर बोलीभाषारो भाषिक रुप -*               गोर बोलीभाषारो ऐतिहासिक भाषाशास्त्र हूबो करेनं गोर बोलीभाषा मौखिक सायित्य घणो मोलेरो सिद्ध वचं.नुसता भाषाशास्त्रज कोनी तो व्याकरणशास्त्र सदा हुबो करेनं अभ्यासकेर एक खमंग खुराक करन भी गोर बोलीभाषा मौखिक सायित्य मुंगा मोलारो ठरचं उदः- *जळेती उपजं;जळेती निबजं* *जळेती मर जावं....* *फलाण्या,हातोहात खप जावं ?* जळेती जन्मचं;जळेती पोसावचं अन मातरम् जळेती मर जावचं,फलाण्या (नुण) हाटेमं हातोहात खप जावचं.               ये मौखिक गोर गोर बोलीभाषा सायित्ये माईरो *ती* ई ध्वनी गोर बोलीभाषारो एक अर्थपूर्ण "भाषिक रुप"सिद्ध वचं.गोर बोलीभाषा सायित्ये माईरो ई *ती* सार्थ लघुतम घटक कतो "नानक्यासो > लघुतम पद",भाषाशास्त्रेर नंजरेती व्याकरणेरो मूलभूत घटक करन भी मुंड्याग आतू दकावचं. *जळेती > जळा पासून* *जळेती > जळा...

वाते मुंगा मोलारी My swan song गोर बोलीभाषाविज्ञान अन व्याकरण - एक चिंतन ! (भाग २ ) भीमणीपुत्र मोहन नाईक

Image
*वाते मुंगा मोलारी*             My swan song *गोर बोलीभाषाविज्ञान अन व्याकरण - एक चिंतन !*           (भाग २ )             भाषार अभ्यासेमं भाषार सामाजिक डिलेसामू दुर्लक्ष करतूज आयेनी.भाषारो सामाजिक डील कतोज समाजभाषाविज्ञान."भाषेच्या समाजातील आविष्काराचा विचार करणारी शाखा म्हणजेच समाजभाषाविज्ञान"हानू डाॅ.कल्याण काळे ये भाषातज्ञेर केण छ.भाषार अभ्यासेमं समाजे माईर भाषार आविष्कारेनं घणो मोल रचं.समाजभाषाविज्ञान कतोज भाषाविज्ञान...!                भाषा व्यवहारेमं शब्द आपआपणे ढंगेती कतो शैलीती वावरते रचं.गोर बोलीभाषा व्यवहारे माईर "सूं" अन "सू"ये शब्दशैलीर उत्कृष्ट उदाहरण छ."आनेर सूं,घुलरासू"ये दोयी वाक्ये माईर एक "सूं" ये शब्देर ध्वनी उच्चार अनुनासिक रेयेर येती सूं अन सू ये दोयी शब्देरो अर्थ बदलगो छ."सूं = सोगन,सू = वांग ईज शब्दानुशासन कतो खरो व्याकरण सिद्ध वचं.भाषामं शब्देरो घणो प्रभाव दकावचं.               "बुर दं,ढाक दं,आनेर...