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Showing posts from July 18, 2019

गोरबोली भाषारो सामाजिक भाषाशास्त्र / समाज भाषा विज्ञान (sociolinguistics) भीमणीपुत्र मोहन गणुजी नाईक

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                            वाते मुंगा मोलारी                          My swan song *गोरबोली भाषारो सामाजिक भाषाशास्त्र / समाज भाषा विज्ञान (sociolinguistics)*   भाषार अलंकार,नऊ रस,नऊरसेर नऊ स्थायीभाव,काव्यगुण अन केणावट,साकी,साकतर ओर मालकीर अलंकारिक शब्देर श्रीमंतीती गोरबोली भाषा सिकासिक भरान वतलरी छ जसो डावोडुंगर,डावोधरांऊ (म्हातारा पाऊस),डावोसाणो,डायीसाणी,साणोसरता ये अलंकारिक शब्दरत्न तो कुणसीज भाषामं लाबेनी.इ गोरबोली भाषार स्वतंत्र अस्तित्वेर ओळख सिद्ध करचं.                  *वेंगणवालो कडीकसालो मन मत घालो तमज खालो!* (अनुप्रास अलंकार) आसे नवलक शब्दालंकारेती सणगारी हूयी ई आतरी श्रीमंत गोरबोली भाषा कुणसे विद्यापीठेमं सिकी विये गोर याडी ? मराठी भाषानं व्याकरण देयेवाळो कुणसो मेजर कॅन्डी गोरबोली भाषानं व्याकरण दिनो विये ? "या मारो कुणसो वीरा घडासीयारे चावळे आवडा फुल ?" इ स्वतंत्र सोजारो विषय छ. ...

"तू" कतेसी रेगो...©®कवी, निरंजन ब मुडे. चिल्ली (ई) पो. निगंणूर. ता. महागाव जि. यवतमाळ.

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                         " तू" कतेसी रेगो...                                   ( कविता ) साळसूकान कोबलभूकान भात कोला  खागो... आट दस बकरार, समनक बी वेगो... * दीचारेक देवेर,* *मीटो भंडारो खागो...!* *आबं तरी पड भडा* *तू" कतेसी रेगो....!!* दी दन पडन करगो सूवाडो... पनाव फूटरो कोनी रोयेलागो नवाडो... झारो झटको पडो जको खाळ्या-रुंगळी चाटगी... पाझरच फूटी कोनी, वावडी-बोर आटगी.... * कास्तकारेतीज रीसारोछी* *वोंदूरो कायी गूनो वेगो...!* *आबं तरी पड भडा,* *तू" कतेसी रेगो...!!* पयले पामणीन  आयलाग छोरी पोरी... खाळ्या-रुंगळी, नदीन भेटेसारु रोरी... दूरतीज देकन, सावकार दबारो गाडी... पामणी छोरीन, कतेती दरावू साडी... कपडा फाटच जू, जमी फाटे लाग... आभाळेसामू देकन छाती दाटे लाग.... * डीलेमायीर लोयी से,* *पाणी वेये लागो...!* *आबं तरी पड भडा,* *तू" कतेसी रेगो...!!* ...