गोरबोली भाषारो सामाजिक भाषाशास्त्र / समाज भाषा विज्ञान (sociolinguistics) भीमणीपुत्र मोहन गणुजी नाईक

                           वाते मुंगा मोलारी
                         My swan song

*गोरबोली भाषारो सामाजिक भाषाशास्त्र / समाज भाषा विज्ञान (sociolinguistics)*

  भाषार अलंकार,नऊ रस,नऊरसेर नऊ स्थायीभाव,काव्यगुण अन केणावट,साकी,साकतर ओर मालकीर अलंकारिक शब्देर श्रीमंतीती गोरबोली भाषा सिकासिक भरान वतलरी छ जसो डावोडुंगर,डावोधरांऊ (म्हातारा पाऊस),डावोसाणो,डायीसाणी,साणोसरता ये अलंकारिक शब्दरत्न तो कुणसीज भाषामं लाबेनी.इ गोरबोली भाषार स्वतंत्र अस्तित्वेर ओळख सिद्ध करचं.
                 *वेंगणवालो कडीकसालो मन मत घालो तमज खालो!* (अनुप्रास अलंकार) आसे नवलक शब्दालंकारेती सणगारी हूयी ई आतरी श्रीमंत गोरबोली भाषा कुणसे विद्यापीठेमं सिकी विये गोर याडी ? मराठी भाषानं व्याकरण देयेवाळो कुणसो मेजर कॅन्डी गोरबोली भाषानं व्याकरण दिनो विये ? "या मारो कुणसो वीरा घडासीयारे चावळे आवडा फुल ?" इ स्वतंत्र सोजारो विषय छ.
          आतरी सौंदर्य संपन्न ई श्रीमंत भाषा दारिद्र्य रेषामं कू आवगी ? आपणे याडीभाषाती आपणो पेट पोसायेनी,प्रतिष्ठा मळेनी ही भिकारचोट वृतीज गोरबोली भाषानं मारक ठरगी. भाषार अभ्यास करतूवणा भी भाषारो अभ्यास इज खरो मौखिक भाषारो अभ्यास रचं ईज गोरबोली भाषार अभ्यासक भुलगे.इंन्डोयुरोपीयन कुळेरी भाषामज गोरबोली भाषारो नाळो धुंडू किदे.गोरबोली भाषार सामाजिक डिलेसामू कनायी दिटेज कोनी.इ वसुस्थिती छ...!

*गोरबोली भाषारो सामाजिक डिल*-

- काहा रे आज घरज दखारो छी,वावरेमावरेसामू गो कोनी ?
- पयीपामण आयेवाळ छ तो हाटेन जान बोटीमोटी लांवू कुचू.
- पयीपामणेनं खरापरान हाबालज वाट लगाडी छू.
- झाड्या रंडवा,का आगबुकरो छी,वरेसी इ तार पांडगा पूजूचूं.
- लारेर तांडेमं एक ठोळीरो डफडा वाजरो छ;कुण समागोको ?
- छोरा आकळा आकळान रोरो छ,काटला आवगो कांयिको?
- बादभरे ठामठिकर घसेर पडेवेरे छ.
- बा तू कना आयेवाळो छी रे ?
- मार भोजायी सुवाडी छ.
- राज्यपाल हाबालज किनोटेन आताणी डगरगो.
- साणोसरता माटी छ;चुकगो विये ?
- घर होरकाती आचमाली सेकार लं,पाणीपावसेर दन छ.
- मार चलमेर छापी लाबरी कोनी.
- गोडो नवान वाते मत कर.
- म झाडं जान आवूचूं.
- मंदर मंदर आंगार सळगरो छ.
- गुंबडी भळभळारी छ,पाचगी कांयिको?
- माकी भणभण कररी छ.
- का भणभण भणका पाडरी छी ?
- आकात आवगो तार मुंड्यागं.
- आजकालेर बांया बांयी भी सदेर भरेनी.
- आज घणो कटाळो आरो छ.
- आसंगणी भी आयेनी.
- कसो छी रे मांदा तू,का वाट जारो छी ओर ?
- वरा तार खोडमोड भांजूचूं.
- कस छीये मांदी तू,म कना वाट गो करन ओर ?
- इलंये याडी!इ कांयी मारो सात फेरारो धणी वेरो?
- साळ्या साडी ताण दिनो.
- वात चेक चित छेई,आचोजभलो मोती रिसारो छ.
- वातेनं सांधोमांधो कांयी छेनी.
- कांयी भळभळ पाणी रेडरो भडा ई ?
(सवारं)

                           *भीमणीपुत्र
                     *मोहन गणुजी नायक*



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