वाते मुंगा मोलारी ( My swan song) गोरबोली भाषारो सामाजिक भाषाशास्त्र / समाज भाषाविज्ञान (Sociolinguistics) भीमणीपुत्र मोहन नाईक

                        वाते मुंगा मोलारी                      My swan song 


गोरबोली भाषारो सामाजिक भाषाशास्त्र / समाज भाषाविज्ञान  (Sociolinguistics)


            गोरबोली भाषार अभ्यास करतूवणा गोरबोली भाषारो सामाजिक संदर्भ कतो गोरबोली भाषा व्यवहार कतोज समाज भाषाविज्ञान...!
                   भाषावार प्रांत रचनारे धोरणेती आज गोरबोली भाषारो सामाजिक संदर्भ/ समाज भाषाविज्ञान धोकेम आवगो छ.लेखन प्रपंचेमं समाजभाषा विज्ञानेर डिलेर मोडतोड वेरी छ.भाषा व्यवहार धोकेम आवगो छ.भाषा व्यवस्था पेक्षा भाषा व्यवहारेरोज अभ्यास भाषावैज्ञानिक करणू हानू भाषातज्ञेर आग्रही भूमिका छ.
           दुद,धयी,तणका,घडीखांड,कटाळो,संवसार,संकर,बेग,रांयी ई गोरबोली भाषा व्यवहार कतो समाज भाषा विज्ञानेर उत्कृष्ट नमुना छ.लेखन प्रपंचेमं आज ये समाज भाषाविज्ञानेपं आघात वेतू दखारो छ.जसो दुध,आंघोळी,संसार,कंटाळो,फेक,राई आसे भाषा व्यवस्थाती गोरबोली भाषारो जडेबुडेरो अस्तित्व आज भ्रष्ट वेतो जारो छ.गोरबोली भाषा व्यवहार जतन करणू ई आजेर पिढी मूंड्यागं एक नवो आव्हान छ.
              बा तू कना आयेवाळो छी रे ?* ई गोरबोली भाषारो समाज भाषाविज्ञान/ भाषा व्यवहार इज खरो व्याकरणेर नंजरेती सुसंगत ठरचं. बा तम कना आयेवाळ छो?* आसे चुकीरे भाषाव्यवस्थाती गोरबोली भाषार अभ्यासेर संशोधनेर वाट धुंदळी वेती जारी छ.येर सारू गोरबोली भाषारो भाषा व्यवहार/समाज भाषाविज्ञान जतन वेणू ई आज काळेर गरज छ.
              आज गोरबोली भाषार अभ्यासेनं गती आवगी छ.भाषार अभ्यासेमं,भाषार सामाजिक संदर्भेनं कतो समाज भाषाविज्ञानेनं घणो महत्व रचं ई भान भी आज जागृत वेते दखारो छ.इ गोरबोली भाषार सवारेर उज्वल भवितव्य अन भवितव्येर नांदी छ..!

गोरबोली भाषार सामाजिक संदर्भ-

- येरी याडरो ! (मराठी - इची भयीन!)
- देख भेनं,एकी चोटेती फळफळ मुता नाकीयूं.
- कती भी तिकोधलस वे जावचं साळो.
- नक्कळज छ कांयी रं साळो ई ?
- नरधमज छ साळो!
- काचे कुलरेरी.
- आडायी चावळेरी.
- चुलो वेगो कांयी,पेटेम कागला बरकारे छ ?
- वरेसी आ,तार झगर काडुचू,घणो वचका कररो छी?
- पेना बायीमनक्या बेडेती पाणी भरन लावतीती.
- च्यारीवडी पाणी पडरो छ,हामार तांडेसामू एक तणका पाणी छेनी.
- रु बुंडार घातू म आयूं तार घर पामणो.
- गोबरेर ओल्डा आपडा दं.
- एक कोळ मूंडो चुमा दं.
- छणा विणेन जारी छू.
- धोतीन आको आवगो छ;टाको मार देस.
- लुडी लगान केरी संवसारेर वाटोळा न करणू.
- घरेमं मारो हातवात रेगो कोनी आबं.
- संज्यावखत मन बोलायेस मत,तार से झाडपीडा काड नाकीयूं.
- बेग दं ओवडी! (फेकून दे तिकडे !)
- जाणनजाणन कोनी,सासीन केरो छू.
- मळाभेट वेगी;हार भंजगी.
- छोरी मोटीयारमाल छ.
- कटाळो मत करतोजो, घडीखांड वावरेमावरेसामू जान आतोजो.
- दाळ बसगी कांयीको,खाटबडस लागरी छ.
- गंधावणो कटामेरो.
- फराकत सोजो.
- गेणागाठा घालन किम निकळी,टटकमटक वेन?
- निघा रकाडेस येपर.
- रुंगळी लंगन परले काठ जातू आयेनी.
         (सवारं)
                                                         भीमणीपुत्र                                                          मोहन गणुजी नाईक
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