वाते मुंगा मोलारी ( My swan song ) गोर बोलीभाषारो सामाजिक भाषाशास्त्र/समाज भाषाविज्ञान (sociolinguistics) भीमणीपूत्र मोहन गणुजी नाईक

                            वाते मुंगा मोलारी
                           My swan song 

  गोर बोलीभाषारो सामाजिक भाषाशास्त्र/समाज भाषाविज्ञान (sociolinguistics)


          गोरबोली बोलीभाषा व्यवहार इज खरो सामाजिक भाषाशास्त्र/समाज भाषाविज्ञान छ.आज मराठी वगैरे अन्य भाषार प्रभावेती गोर बोलीभाषा व्यवहार कतो समाज भाषाविज्ञान धोकेमं आवगो छ.येनं मार लकणी सदा अपवाद छेनी.मार लकणीम भी "संस्कृती,भाषा,लेखन प्रपंच,शब्द"आसे वणान शब्द आवूं करचं.अभिव्यक्ती सामर्थ्य धोकेमं न आणू येरवासं तत्सम,तद्भव,परभाषीय अन देशी ये शब्दसिद्धीर वापर वेतो रचं.येनं मराठी भाषा भी अपवाद छेनी.जना आपण समाज भाषाविज्ञानेर अभ्यास कराचा जना मातरम गोर बोलीभाषा व्यवहार नंजरे हुड्यांग (आतं मुंड्यागं इ शब्द बेसेनी ) लेणू आवश्यक रचं.मौखिक भाषा व्यवहार इज खरो भाषाशास्त्रेर अभ्यासेर खुराक रचं.येर सवायी गोर बोलीभाषारो ऐतिहासिक भाषाशास्त्र हूबो करतूज आयेनी,येरवासं गोर बोलीभाषा व्यवहार जतन वेणू आवश्यक रचं.
          आतं एक वात धेनेम लेये सरिख छ क,गोर बोलीभाषा व्यवहारे माईर "डावोडुंगर,डावोसाणो,डायीसाणी,डावो धरांऊ (पुष्य नक्षत्राचा म्हातारा पाऊस),साणो सरता"आसे अलंकारिक शब्देपं कुणसीज भाषारो प्रभाव पड सकेनी.कवडाही भाषिक संक्रमण काळ आयेतो भी ये अलंकारिक शब्देपं आक्रमक करेर कुणसीज भाषार हिंमत वे सकेनी इ गोर बोलीभाषा व्यवहारेर विशेष छ.
               गोर बोलीभाषा व्यवहारेमं "संस्कृती"ये शब्देसारू गोर बोलीभाषार मालकीरो स्वतंत्र शब्द "धाटी" तो परंपरा ये शब्देसारू "रुढी"ये शब्द अस्तित्वेम छ.धाटी > पळणे,रुढी > पळणे ये गतीवाचक शब्द छ.मराठी "रुढ"ये शब्देर व्युत्पत्तीर जड भी गोर बोलीभाषा व्यवहारेर माईर "रुढी"ये शब्देमं लाबचं,तो पचं आतरी समृद्ध गोर बोलीभाषा अशुद्ध कू वे सलचं? सुप्रसिद्ध सायित्यिक डाॅ. विठ्ठल वाघ कचं क,"जातीवंत सर्जनशील साहित्याची भाषा ही बोल,बोलीच असते". अभिजात सर्जनशील सायित्य निर्माण करेर धम्मक भी गोर बोलीभाषामं छ,तो पचं गोर बोलीभाषा व्यवहारेनं अशुद्ध कू केतू आये ?
        कुणसीज भाषा शुद्धत्वेर होड भांद सकेनी.इंग्रजी सरिख जगमान्य भाषा आतरी संकरित भाषा दुसर कुणसीज आढळेनी;तरी पणन इंग्रजी भाषा आधिकृत भाषा करन जगमान्य वेगी छ.भाषार दर्जासारू शुद्ध अशुद्ध ये नेम लागू वेयेनी.काहा कतो तत्सम,तद्भव, परभाषीय शब्दसिद्धी सवायी भाषानं गती लागेनी.प्रमाण भाषा ई बोलीभाषा माईतीज वेपडी हुयी रचं बोलीभाषा अशुद्ध अन प्रमाण भाषा शुद्ध ये से वाते थोतीभस छ;थोतांड छ..!

*सामाजिक गोर बोलीभाषा व्यवहार-*

- लकणघल्डांऊ कटामेरो,जरा सुदो रं नी ?
- जलमी कडापो छ मार लारं.
- याडी मरी, कवडाभला लांबोकीडा सळसळ करतो जारो.
- अरे बापरे, खाळ्यान कवडा मोटो पूर आवगो?
- केरी आळकळाट न लेणू भेनं;साटीसराप लागचं.
- धरम आडो आवगो नतो मार कांयी खरो कोनी रं.
- तांडेमं बोदरी निकळरी छ,छेंडोछपाटो मत लागे दो.
- आंबड पाकेर मिनार तावडो डिलेनं घणो चटचट लागचं.
- हामार तांडेर पाच छोरी पंण्णागी (पाच मुली उजवल्या)
- भेसीन धोवणधावण मांड.
- भावळीर मिनामं भारी झगरे लागं.
- सगासेण आयेवाळ छ,सरबसरायी आलमाली करजो.
- मांयीर मांयी आमळा मत.
- उपर काळ भमरो छ.
- हुड याडी,इ कांयी जंजाळ लाग्गो मार लारं.
- रुढी मार.
- कागला बेसगो (ऋतुमति)
- कसेन वेला कररो छी ?
- माटी घणो चंदरो छ,डिलेन पाचोळा लागे देयेनी.
- जना आवंजना हानूज वाट जांवू करचं मार.( नित्याचेच)
(सवारं)

                                            भीमणीपुत्र
                                      मोहन गणुजी नायक



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